सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट में बरामदा निर्माण को दी मंजूरी, यूनेस्को नियमों के उल्लंघन की आशंका खारिज
नई दिल्ली, 29 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें हाईकोर्ट परिसर में कोर्टरूम नंबर 1 के बाहर बरामदा निर्माण और पार्किंग क्षेत्र के विकास का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह निर्माण यूनेस्को विश्व धरोहर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस फैसले में न्यायिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने पर बल दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2023 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सचिव विनोद धट्टरवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) से शुरू हुआ, जिसमें हाईकोर्ट परिसर में बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को अपने आदेश में कोर्टरूम नंबर 1 के सामने बरामदा निर्माण और कच्चे पार्किंग क्षेत्र को विकसित करने का निर्देश दिया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि हाईकोर्ट भवन, जो विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार ले कॉर्बूसिए द्वारा डिजाइन किए गए कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है और 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित हुआ, में कोई भी निर्माण यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं हो सकता। प्रशासन ने आशंका जताई कि बरामदा निर्माण से इस स्थल का धरोहर दर्जा खतरे में पड़ सकता है और यह डीलिस्टिंग का कारण बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा, “हाईकोर्ट का कोर्टरूम नंबर 1 के सामने बरामदा निर्माण का निर्देश, जो कोर्टरूम नंबर 2 से 9 के सामने मौजूदा तीन बरामदों के डिजाइन के अनुरूप है, पूरी तरह से उचित है और यह यूनेस्को दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं करता।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बरामदा एक “न्यूनतम सुरक्षात्मक उपाय” है, जो वादियों द्वारा विशेष रूप से प्रतिकूल मौसम में सामना की जाने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश का कोर्टरूम एक अलग ब्लॉक में स्थित है, जहां कोई ढका हुआ रास्ता नहीं है।
पार्किंग क्षेत्र के विकास के संबंध में, कोर्ट ने पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन पेवर ब्लॉक्स और वृक्षारोपण की अनुमति दी। प्रशासन ने दावा किया था कि यह क्षेत्र चंडीगढ़ मास्टर प्लान के तहत संरक्षित हरा-भरा बेल्ट है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा, “ग्रीन पेवर ब्लॉक्स वर्षा जल के रिसाव को संभव बनाते हैं, धूल को कम करते हैं और सौंदर्य को बढ़ाते हैं, बिना पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए।” कोर्ट ने हाईकोर्ट को भूनिर्माण विशेषज्ञों से परामर्श कर पेड़ लगाने का निर्देश दिया ताकि हरे-भरे क्षेत्र को और समृद्ध किया जा सके।
न्यायिक टिप्पणी और निर्देश
जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने फैसले में टिप्पणी की, “हाईकोर्ट परिसर में प्रतिदिन लगभग 4,000 वाहनों की आवाजाही के कारण पार्किंग की तीव्र कमी है। ग्रीन पेवर ब्लॉक्स और वृक्षारोपण जैसे पर्यावरण-अनुकूल उपाय इस समस्या का समाधान करते हैं, बिना धरोहर स्थल की अखंडता को प्रभावित किए।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यूनेस्को विश्व धरोहर समिति से बाद में स्वीकृति की आवश्यकता हो, तो प्रशासन ऐसा कर सकता है। कोर्ट ने कहा, “ऐसी स्वीकृति, यदि आवश्यक हो, इस न्यूनतम सुरक्षात्मक उपाय के कार्यान्वयन में बाधा नहीं डालती।”
हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना कार्यवाही
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बरामदा निर्माण छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था और अनुपालन न करने पर 13 दिसंबर 2024 को चंडीगढ़ प्रशासन और इसके मुख्य अभियंता सी.बी. ओझा के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए अवमानना कार्यवाही को 12 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया, ताकि प्रशासन को आदेशों का पालन करने का अवसर मिल सके।
प्रशासन की चिंताएं और कोर्ट का जवाब
चंडीगढ़ प्रशासन ने 10 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन प्राप्त किया था, जिसमें कैपिटल कॉम्प्लेक्स के धरोहर दर्जे को खतरा होने की बात कही गई थी। प्रशासन ने तर्क दिया कि चंडीगढ़ धरोहर संरक्षण समिति ने सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी, लेकिन यह पेरिस में फॉन्डेशन ले कॉर्बूसिए से परामर्श और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मामले के हवाले करने के अधीन थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को निराधार माना, यह कहते हुए कि बरामदा का डिजाइन मौजूदा वास्तुकला के अनुरूप है और यह कोई बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन नहीं है।
महत्व और प्रभाव
यह फैसला न्यायिक बुनियादी ढांचे की व्यावहारिक आवश्यकताओं को पूरा करने और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ले कॉर्बूसिए द्वारा डिजाइन किया गया पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ के कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है, जो आधुनिक वास्तुकला का एक प्रतीक है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सुनिश्चित करता है कि इसकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो, बिना इसके वैश्विक धरोहर मूल्य को प्रभावित किए।