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पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर पर NOTA और प्रत्याशियों के नाम को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

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लखनऊ:  इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ‘नोटा’ (NOTA) का विकल्प लागू करने और बैलेट पेपर पर चुनाव चिन्ह के साथ प्रत्याशियों का नाम अनिवार्य रूप से छापने की मांग की गई है।

यह याचिका हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार मौर्य द्वारा दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि वर्तमान व्यवस्था में पंचायत चुनावों के बैलेट पेपर पर केवल चुनाव चिन्ह (Symbol) होता है और प्रत्याशी का नाम नहीं होता, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। साथ ही, ‘नोटा’ का विकल्प न होना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

शहरी और ग्रामीण मतदाताओं में भेदभाव का आरोप
याचिकाकर्ता सुनील कुमार मौर्य ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग शहरी निकाय (नगर निगम/नगर पालिका) चुनावों में तो NOTA का विकल्प देता है, लेकिन ग्रामीण (पंचायत) मतदाताओं को इससे वंचित रखा गया है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और ग्रामीण मतदाताओं के साथ भेदभाव है।

आयोग का तर्क: 60 करोड़ मतपत्र छापना मुश्किल
याचिका में एक आरटीआई (RTI) जवाब का हवाला दिया गया है। 20 अगस्त 2025 को राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि पंचायत चुनाव में लगभग 55-60 करोड़ मतपत्र छपते हैं और समय कम होता है, इसलिए नोटा और नाम छापना संभव नहीं है। याचिकाकर्ता ने इस तर्क को “असंवैधानिक” बताते हुए चुनौती दी है और कहा है कि प्रशासनिक कठिनाई को आधार बनाकर मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि वह राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी चुनावों में बैलेट पेपर पर प्रत्याशी का नाम और NOTA का कॉलम शामिल करने का निर्देश दे।

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