राहुल गांधी की अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की: सेना पर टिप्पणी का मामला
लखनऊ, 30 मई 2025: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस के बड़े नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की एक अपील को खारिज कर दिया। यह अपील एक मानहानि (बदनामी) के मामले से जुड़ी थी, जिसमें उन पर भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ गलत बातें कहने का आरोप है। जज सुभाष विद्यार्थी ने कहा कि राहुल गांधी सत्र न्यायालय (सेशंस कोर्ट) में दूसरी अपील दाखिल कर सकते हैं। पूरा फैसला सोमवार तक आएगा।
मामले की पूरी बात
यह मानहानि का मामला वकील अनुपम कुमार द्विवेदी ने फरवरी 2023 में लखनऊ की एक छोटी अदालत (एसीजेएम कोर्ट) में दाखिल किया था। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने 6 नवंबर 2022 को अमेठी में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारतीय सेना जंग नहीं लड़ती, यह सिर्फ सरकार के प्रचार के लिए इस्तेमाल होती है।” शिकायत के मुताबिक, यह बात सेना का अपमान करती है और देश के लोगों के गर्व को ठेस पहुंचाती है। ये बातें पर्चों और न्यूज के जरिए भी फैलाई गईं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी।
छोटी अदालत ने शिकायत और कुछ गवाहों के बयान सुनने के बाद दिसंबर 2024 में राहुल गांधी को कोर्ट में बुलाया। यह मामला इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 499 और 500 के तहत है, जो बदनामी से जुड़ा है। राहुल गांधी के वकीलों, प्रांशु अग्रवाल और मोहम्मद समर अंसारी, ने कहा कि यह शिकायत गलत है और इसमें कोई दम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटी अदालत ने कानूनी तरीके का पालन नहीं किया, जैसे कि कुछ मामलों के लिए सरकार से इजाजत लेना जरूरी होता है।
सरकारी वकीलों, जैसे वी.के. शाही, वी.के. सिंह और अनुराग वर्मा, ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि राहुल गांधी की अपील हाई कोर्ट में नहीं चल सकती, क्योंकि उनके पास सेशंस कोर्ट में दूसरी अपील दाखिल करने का रास्ता है (सीआरपीसी की धारा 397 या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 438 के तहत)। उन्होंने कहा कि शिकायत और गवाहों के बयानों से मानहानि का शुरुआती मामला बनता है।
हाई कोर्ट ने मामले की गहराई में न जाकर कहा कि राहुल गांधी सेशंस कोर्ट में अपनी बात रख सकते हैं, इसलिए उनकी अपील अभी जल्दबाजी में दाखिल की गई है। अब यह मामला छोटी अदालत में चलेगा, जहां अगली सुनवाई जून 2025 में होगी।
पहले भी मानहानि का मामला
यह राहुल गांधी का पहला मानहानि का मामला नहीं है। अप्रैल 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी एक और अपील खारिज की थी, जिसमें उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर को “अंग्रेजों का नौकर” कहा था। उस मामले में भी कोर्ट ने उन्हें सेशंस कोर्ट में अपील दाखिल करने को कहा था।
राजनीतिक तनाव
राहुल गांधी के इन कानूनी मामलों ने बहुत ध्यान खींचा है। आरोप लगाने वाले कहते हैं कि उनकी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की बातें उकसाने वाली थीं। दूसरी ओर, उनके समर्थक मानते हैं कि ये मामले राजनीतिक दुश्मनी की वजह से दाखिल किए गए हैं, ताकि उनकी सरकार के खिलाफ आवाज को दबाया जा सके। कांग्रेस पार्टी ने अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
यह मामला भारत के राजनीतिक माहौल में बोलने की आजादी और कानूनी जिम्मेदारी के बीच के तनाव को दिखाता है।









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